नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने एलान तो किया है कि उनके तीसरे कार्यकाल में देश और बड़े फैसले देखने वाला है, लेकिन इसकी राह में बड़ी बाधा बीजेपी को खुद के दम पर बहुमत हासिल न होना और ‘एन’ फैक्टर की मजबूती है। पहली बार मोदी गठबंधन की ही सरकार चलाने जा रहे हैं। इस गठबंधन में सबसे बड़ा शेयर चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी का है। टीडीपी ने आंध्र प्रदेश में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 16 सीटें जीती हैं। वहीं, नीतीश कुमार की जेडीयू के 12 सांसद चुनकर आए हैं। जाहिर है, खुद के दम पर 272 सीटों का बहुमत का आंकड़ा न होने के कारण पीएम मोदी को बड़े फैसले लेने के लिए चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को साधे रखना होगा।

पीएम मोदी के नेतृत्व में जब बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव लड़ा, तो अपने घोषणापत्र में कई अहम वादे किए थे। इनमें समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का वादा भी था। इसके अलावा एक देश एक चुनाव का वादा भी बीजेपी ने किया। इन दोनों ही मसलों पर अब मोदी सरकार कितना आगे बढ़ सकेगी, इसे लेकर भी शंका है। इसकी वजह ये भी है कि लोकसभा में मोदी सरकार के पास अब दो-तिहाई बहुमत नहीं है। इसकी वजह से संविधान में संशोधन करना भी आसान काम नहीं रहने वाला है। साथ ही इंडिया गठबंधन की ज्यादा सीटें होने के कारण संसद में मोदी की सरकार पर दबाव भी काफी बनेगा। वहीं, मोदी ने चुनावी जनसभाओं में ये एलान भी किया था कि भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने का सिलसिला जारी रहेगा। मौजूदा सियासी हालात देखकर अब इसमें कितना आगे पीएम मोदी बढ़ सकेंगे, ये भी देखना है।
इसके अलावा सरकार में भी अब टीडीपी और जेडीयू का अच्छा शेयर रहने की संभावना है। बीजेपी को जहां 242 सीटों पर जीत मिली है। वहीं, टीडीपी के 16, जेडीयू के 12, शिवसेना के 7, एलजेपी (आर) के 5, आरएलडी, एनसीपी, अपना दल, जेएनपी, हम, एजीपी और आजसू के भी 1-1 सांसद हैं। जाहिर है, मंत्रीमंडल में बीजेपी के अलावा टीडीपी और जेडीयू को भी अहम विभाग मिलने की इस बार काफी गुंजाइश है।