भोपाल । मध्य प्रदेश के चर्चित परिवहन घोटाले यानी सौरभ शर्मा मामले में लोकायुक्त पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर के ठिकानों पर 19 दिसंबर को हुए छापे की अगुवाई करने वाले लोकायुक्त डीएसपी संजय शुक्ला का ट्रांसफर हो गया। लोकायुक्त संगठन से हटाकर उन्हें पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) भेज दिया गया है। इस संबंध में मध्य प्रदेश लोकायुक्त कार्यालय से आदेश भी जारी कर दिया गया है।

    19 दिसंबर को लोकायुक्त पुलिस ने दो टीमों में बंटकर छापेमारी की थी।पहली टीम ने सौरभ शर्मा के ई-7/78 स्थित आवास पर दबिश दी, जिसकी कमान डीएसपी वीरेंद्र सिंह के पास थी। दूसरी टीम ने सौरभ के ही ई-7/657 स्थित कार्यालय पर छापा मारा, जिसका नेतृत्व डीएसपी संजय शुक्ला कर रहे थे। संजय के ट्रांसफर को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है।

सौरभ के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई में काली कमाई से अर्जित संपत्ति के सबूत मिले थे, जिसमें करोड़ों की चल-अचल संपत्ति, गाड़ियां और नकदी शामिल थी। इसका मुद्दा विधानसभा में भी खूब उठा था।

सौरभ शर्मा के ठिकानों पर कार्रवाई में शामिल डीजी जयदीप प्रसाद का भी ट्रांसफर हो चुका है। लोकायुक्त संगठन में फेरबदल का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले डीजी लोकायुक्त जयदीप प्रसाद का भी तबादला हो चुका है। अब डीएसपी स्तर के अधिकारियों के भी एक के बाद एक ट्रांसफर किए जा रहे हैं।

लोकायुक्त संगठन में लगातार तबादले हो रहे हैं। डीएसपी संजय शुक्ला को पीएचक्यू भेजा गया। तीन अन्य डीएसपी स्तर के अफसरों की प्रतिनियुक्ति खत्म की गई।चार अफसरों को अन्य इकाइयों में पदस्थ किया गया है। डीजी लोकायुक्त योगेश देशमुख ने इन तबादलों के आदेश जारी किए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि डीएसपी संजय शुक्ला के नेतृत्व में हुई छापेमारी में कुछ संवेदनशील जानकारी सामने आई थी, जिससे कुछ प्रभावशाली लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती थीं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका किसी भी कार्रवाई से कोई लेना-देना नहीं है।