भोपाल। संत शिरोमणि श्री १०८ विद्या सागर जी महाराज जी के मंगल आर्शीवाद से उनके परम प्रभावी शिष्य परम पूज्य मुनि श्री १०८ संभव सागर जी महाराज जी की मंगल आशीर्वाद से  अशोका गार्डन, भोपाल स्थित श्री १००८ पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अशोका गार्डन जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारी जयदीप भैया के सानिध्य में श्रावक को द्वारा उत्साह के साथ श्री १००८ पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बनाया गया।

जैन समाज के तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक 15 अगस्त को मोक्ष सप्तमी के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर दिगंबर जैन मंदिर में निर्वाण लाडू चढ़ाए गए।

तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का चरित्र क्षमा की प्रतिमूर्ति है। उनके जन्म के 10 भवों से कमट का जीव प्रत्येक भव में क्रोध, हिंसा की पराकाष्ठा पर पहुँचा, परंतु पार्श्वनाथ हर भव में उसे क्षमा करते गए ।ब्रह्मचारी  भैया द्वारा  मोक्ष सप्तमी का महत्व समझाते हुए  कहा कि पार्श्व प्रभु की निर्वाण बेला का पावन पर्व मोक्ष सप्तमी प्राणी मात्र को पावन पवित्र करें। सभी के दिलों को परस्पर जोड़कर हम चैतन्य प्रभु से जोड़ें, पुण्यात्मा जहाँ भी चरण रखते हैं, वहाँ दुःख रूपी अंधकार स्वतः ही प्रकाश पा जाते हैं। सभी सुविधाएँ सहज सुलभ हो जाती हैं, पारस प्रभु का स्पर्श हमको स्वर्ण नहीं पारस बना देता है।

मोक्ष की प्राप्ति का एकमात्र उपाय है मोह का परित्याग। जिस प्रकार भगवान पार्श्वनाथ ने अनेक उपसर्गों को सहन करते हुए कठिन तपस्या की एवं मोह का त्याग कर अपने जीवन में समता का निर्माण किया एवं मोक्ष को प्राप्त किया, उसी प्रकार हर श्रावक को भी मोह छोड़ना पडेगा, तभी आत्मा का कल्याण  होगा।प्रवक्ता अंकित कंट्रोल ने बताया आज  श्रावकों ने चांदि की पांडुशिला पर बोलियां के माध्यम से चयनित पात्र दिपक जी आशु पड़िया ने भगवान को विराजमान किया । जिसके बाद महा मस्तकाभिषेक सतिश , अमित किराना ,अनुज दिल्ली, ने किया साथ ही महा मस्तअभिषेक होने के पश्चात सभी श्रावकौ ने भक्ति नृत्य के साथ 52 किलो का निवार्ण लाडू अर्पित किया आज कल्याण मंदिर स्त्रोत विधान बहार  – बरेली , इन्दौर , सागर महाराष्ट्र आदि

से आए श्रावकों ने बड़े उत्साह से संपन्न किया। आज मुनि श्री संभव जी से आशीर्वाद प्राप्त कर मोक्ष सप्तमी को ५० से अधिक बच्चों ने उपवास किया।

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