ग्वालियर। मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के गोहद थाने में तैनाती के दौरान झगड़े के मामले में 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए प्रधान आरक्षक रामकुमार गोस्वामी को भिण्ड जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) उमेश पांडव ने दोष सिद्ध होने पर कल 5 साल कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को भिण्ड जेल भेज दिया गया। विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अमोल सिंह तोमर का कहना है आरोपी प्रधान आरक्षक ने रिश्वत के मामले में न्यायालय में चालान पेश होने से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया था, जिससे उसे पेंशन का लाभ मिल रहा है, लेकिन अब इस पर कार्रवाई की जाएगी।
विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अमोल सिंह तोमर ने आज यहां बताया कि 24 अप्रैल 2014 को भिण्ड जिले के गोहद थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक रामकुमार गोस्वामी को ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस टीम ने 3 हजार रुपए की रिश्वत के आरोप में रंगे हाथ पकड़ा था। विशेष लोक अभियोजन अधिकारी के मुताबिक गोहद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खुर्द गांव में मनोज शर्मा और गणेश शर्मा के बीच झगड़ा हुआ था। गोहद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। आरोपी प्रधान आरक्षक झगड़े के उस मामले की विवेचना कर रहे थे, जिसमें मनोज शर्मा आरोपी था। मनोज शर्मा ने प्रधान आरक्षक से जमानत दिए जाने की बात की तो प्रधान आरक्षक ने 5 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी, लेकिन बाद में 3 हजार रुपए तय हुए। मनोज शर्मा ने रिश्वत देने के बजाए लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर में रिपोर्ट की। लोकायुक्त की टीम ने प्रधान आरक्षक की रिकॉर्डिंग कराई। रिश्वत के रुपए देना 24 अप्रैल 2014 को तय हुआ। इसी दिन मनोज शर्मा से 3 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए आरोपी प्रधान आरक्षक रामकुमार गोस्वामी को लोकायुक्त ग्वालियर की टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया। इस मामले में आरोपी प्रधान आरक्षक पर आरोप साबित होने पर विशेष न्यायाधीश ने आरोपी रामकुमार गोस्वामी को 5 साल कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद रामकुमार गोस्वामी को भिण्ड जेल भेज दिया गया।
विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अमोल सिंह तोमर ने बताया कि आरोपी प्रधान आरक्षक को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत के मामले में रंगे हाथ पकड़ा था। प्रधान आरक्षक को मालूम था कि रिश्वत के मामले में बचना मुश्किल होगा। इसलिए उसने रिश्वत के मामले का न्यायालय में चालान पेश होने से पहले ही पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ले लिया। इस कारण आरोपी को पेंशन बगैरह अन्य लाभ मिल रहे हैं। अभियोजन अधिकारी का कहना है कि अब सजा हो चुकी है तो जो लाभ मिल रहे हैं उन पर कार्यवाही की जाएगी।