लखनऊ। लखनऊ के पारा स्थित बुद्धेश्वर निर्वाण रिहैबिलिटेशन सेंटर के 24 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मंगलवार को उल्टी-दस्त और पेट में दर्द समेत दूसरी दिक्कतों के बाद सबको लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 घंटे में इलाज के दौरान 16 साल की रेनू और दीपा की मृत्यु हो गई। स्वास्थ्य विभाग के लोगों का कहना है कि आश्रम में बच्चे 10 दिन से पेट दर्द, उल्टी जैसी शिकायतें कर रहे थे। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उल्टी के साथ कुछ बच्चों के पेट से कीड़े भी निकले। दोनों किशोरियों के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। डेथ ऑडिट कराया जा रहा है। विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
दो बालिकाओं की हालत गंभीर है, जिन्हें रेफर किया गया है। फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। निर्वाण संस्था में अनाथ मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को आश्रय दिया जाता है। यहां 147 बच्चे हैं। 21 मार्च को चार बच्चों की तबीयत बिगड़ी। उन्हें लोकबंधु अस्पताल लाया गया। फिर चार और बच्चों को 22 मार्च को भर्ती कराया गया। इसके बाद बच्चों के बीमार होने का सिलसिला शुरू हो गया। बुधवार तक 24 बच्चों को लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से दो की मृत्यु हो गई। तबीयत में सुधार के बाद पांच बच्चों को डिस्चार्ज कर दिया गया है।
उल्टी के साथ बच्चों के पेट से निकले कीड़े
निर्वाण आश्रय केंद्र में दस दिन से बच्चे बीमार थे। पेट दर्द, उल्टी जैसी शिकायतें थीं। आरोप है कि न डॉक्टर को दिखाया गया और न ही अस्पताल पहुंचाया गया। बच्चों की बीमारी छिपाने की कोशिश की गई। जब स्थिति गंभीर हो गई तो लोकबंधु अस्पताल पहुंचे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना कि बच्चे अचानक बीमार नहीं पड़े। उन्हें कई दिनों से समस्या थी। पेट के संक्रमण के कारण उल्टी, पेट दर्द और डायरिया की शिकायत थी। मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। जब 10 से अधिक बच्चों की हालत गंभीर हुई तो चार बच्चों को लोकबंधु अस्पताल भेजा, ताकि अपनी कमियों पर पर्दा डाल सकें। बाकी छह बच्चों की जब हालत गंभीर हुई तब उनमें चार को अस्पताल भेजा गया।
फूड प्वाइजनिंग की आशंका
बच्चों के बीमार पड़ने का कारण फूड प्वाइजनिंग बताया जा रहा है। यह खराब भोजन और दूषित पानी से हो सकता है। बीमार होने से पहले बच्चों को दाल, चावल और सब्जी खाने में दिया गया था। संस्थान की अधीक्षिका ने अभी तक भोजन और पानी की गुणवत्ता का पता लगाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया है। इस मामले में बाल गृह की अधीक्षिका प्रीति मिश्र से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने घटना के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। वहीं, लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि हालत गंभीर होने पर दो बच्चों गोपाल और लकी को रेफर किया गया है। बच्चों में संक्रमण अधिक है।
दो मौत के बाद जागा प्रशासन, खाद्य वस्तुओं के नमूने लिए
निर्वाण संस्थान के दो बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। खाद्य विभाग ने संस्थान में दाल, चावल, सब्जियां, मसालों व तेल आदि के 16 नमूने एकत्र किए। महिला कल्याण निदेशक संदीप कौर, डिप्टी सीएमओ समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। आरओ प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, निर्वाण संस्था के प्रमुख एसएस घपोला ने बताया कि पानी की वजह से बीमारी फैलने की आशंका है। खाद्य वस्तुओं से समझौता नहीं किया गया है। पानी व सीवर लाइन नजदीक है। हो सकता है कि लाइन में लीकेज की वजह से यह समस्या आई हो।
संस्था को जारी की गई नोटिस
निर्वाण संस्था के आश्रम में बच्चियों के बीमार होने पर संस्था को नोटिस जारी कर जांच शुरू कर दी गई है। जिला प्रोवेशन अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि बच्चियों के बीमार होने की सूचना मिली थी। मैंने निरीक्षण किया था। सम्बंधित एनजीओ निर्वाण को नोटिस जारी कर दी गयी है। साथ ही यहां के भोजन व पानी की सैंम्पलिंग करायी गयी है। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
क्या बोले सीएमओ
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने कहा कि निर्वाण संस्था में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी गई। 70 बच्चों की जांच कराई गई। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को लोकबंधु अस्पताल में भेजा गया है।