ग्वालियर। चिकित्सा शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन दर्शन व चिंतन हम सब को आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। उनके चिंतन से आज की युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाने की जरुरत है, ताकि भारत फिर से विश्वगुरु बन सकें।
श्री मिश्रा ने उक्त आशय के उदगार ”स्वामी विवेकानंद के विचार दर्शन का भारतीय साहित्य पर प्रभाव” विषय पर आयोजित हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद के समापन सत्र में व्यक्त किए। इस राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा ग्वालियर द्वारा अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सहयोग से यहाँ जीवाजी विश्वविद्यालय स्थित गालव सभागार में किया गया। राष्ट्रीय परिसंवाद का समापन रविवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षाविद चिंतन कर ऐसे निष्कर्ष निकालें, जिन्हें ग्रहण कर युवा पीढ़ी रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ संस्कारवान भी बने। उन्होंने कहा कि विवेकानंद जी का भी कहना था कि तकनीक, अर्थ और धर्म के बेहतर समन्वय से विश्व का कल्याण संभव हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढी को देशभक्ति और संस्कारिक बनाने के लिये शिक्षाविदों द्वारा चिंतन कर जो भी निष्कर्ष निकाले जाएंगे, उन्हें मूर्तरूप देने का प्रयास पूरी शिद्दत के साथ किया जाएगा।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. यतीन्द्र तिवारी ने दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद में पढ़े गए 25 से अधिक शोध निबंधों के निष्कर्षों पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि इस परिसंवाद में भारत के अतीत व गौरव का स्मरण युवा पीढ़ी को कराने के प्रयास भी किए गए। साथ ही स्वामी विवेकानंद के सामाजिक और आध्यात्मिक चिंतन पर भी परिसंवाद में विचार विमर्श हुआ। समापन सत्र में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनलाल छीपा ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर मध्य भारत हिन्दी साहित्य सभा से जुड़े श्रीयुत श्रीधर पराड़कर व डॉ. बसंत पुरोहित मंचासीन थे। साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी परिसंवाद में मौजूद थे।