
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि कुछ माह पूर्व ही भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार से विशेष अदालत कानून को मंजूरी दिलाने के लिए हाय तौबा मचाई थी। आज नौ माह बाद भ्रष्टाचार रोकने के लिए आपकी नई व्यवस्था ने क्या किया यह तो पता नहीं लेकिन 9 माह बाद आपने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए सी.बी.आई. को काम करने से जरूर रोका। श्री सिंह ने कहा कि आपने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना 1946 के एक्ट के प्रावधानों के विपरीत जाकर जो अपने स्तर पर निर्णय लिया है यह संघीय व्यवस्था के विरूद्ध है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजपत्र में प्रकाशित स्पष्टीकरण से यह साबित हो रहा है कि आप सी.बी.आई. को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जांच करने से रोकना चाहते हैं जो भ्रष्टाचार में लिप्त है। निश्चित ही ऐसे अधिकारियों की संख्या बहुत कम है लेकिन आपकी सरकार की शह पर भ्रष्टाचार करने वाले इन थोड़े से अधिकारियों के खिलाफ सी.बी.आई. संस्था को जांच से रोकना मतलब उन असंख्य अधिकारियों-कर्मचारियों का मनोबल तोड़ना और उन्हें बदनाम करना है जो ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में लिखा कि मुझे जानकारी मिली है कि शासन स्तर पर आपने ऐसे प्रयास किए हैं ताकि सी.बी.आई. को मनरेगा और कोल घोटाले के मामले में बड़ी कार्यवाही से रोका जा सके। श्री सिंह ने लिखा कि लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के कई मामलों में दोषी पाए गए आई.ए.एस. और अन्य अधिकारियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश करने की अनुमति मांगी है जो उन्हें आज तक नहीं मिली।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि मेरे साथ ही प्रदेश की साड़े सात करोड़ जनता आपसे वस्तु स्थिति जानना चाहती है, क्योंकि आने वाले दिनों में प्रदेश में हुए कई बड़े घोटालों की परतें खुलने की उम्मीद है। आपके इस निर्णय से इस संदेह को बल मिलता है कि उसे रोकने के लिए आपने ऐसा निर्णय लिया।