महामारी के इस दौर तनाव में रिस्तो का टूटना और बिगड़ना आम घटना होती जा रही है इस समय में लोग कुछ अधिक ही अधीर होते जा रहे हैं। एक तरह से कह सकते हैं कि हम सभी दूसरों को सुनने की क्षमता खो रहे हैं। साथ ही हमेशा ख़ुद को सही साबित करने की होड़ लगी रहती है। हमने दूसरों की भावनाओं को समझना भी बंद कर दिया है, जिससे हमारे रिश्तों में खटास पैदा होती जा रही है। यही कारण है कि हम बहुत सारे विवाहित जोड़ों को तलाक़ लेते हुए देखते हैं और कई युवा जोड़े टूट रहे हैं। रिश्तों में बहस या फिर वाद-विवाद अधिक हो रहा है। छोटी-छोटी बहस बढ़ते हुए बड़ा रूप ले लेती है और पति-पत्नी के रिश्ते बिखर जाते हैं। इसी संबंध में काउंसलर और टैरो कार्ड रीडर जीविका शर्मा ने कई उपयोगी बातें बताई।
एक व्यक्ति को अपने रिश्ते को बचाने के लिए क्या करना चाहिए?व्यक्ति को एक प्रयास ज़रूर करना चाहिए, यदि वो वास्तव में अपने रिश्तों को बचाना चाहते हैं। साथ ही व्यक्ति को अपने रिश्ते को लेकर गंभीर होना चाहिए। निम्न बातों को ध्यान रखते हुए एक व्यक्ति अपने रिश्ते को बचा सकता है-
तनाव के दौरान अपना ही तर्क चलाने की कोशिश ना करें। माना Relationship में बहस, वाद-विवाद, तर्क आदि आमबात हैं, क्योंकि कोई भी दो व्यक्ति बिल्कुल समान नहीं होते। और जब मतभेद होते हैं, तो तर्क भी होंगे ही। इसलिए यदि आप जब कभी भी अपने पार्टनर के साथ बहस करते हैं, तो आपको इसे अपने साथी को बेहतर तरीक़े से सीखने के अवसर के रूप में देखने की ज़रूरत है। सकारात्मक बातचीत करें। परिस्तिथियों से भागे नहीं, बल्कि आपसी बातचीत से समस्या हमेशा के लिए हल हो जाएगी।
जब भी अपने Partner के साथ किसी बात पर बहस होती है, तो आपको अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। अगर आप ग़ुस्सा दिखाते हैं, तो आप Life Partner को कभी नहीं सुन सकते और ना ही समझ सकते हैं। और जब आप सुन नहीं सकते, तो आप बहस के मूल कारण तक नहीं पहुंच पाएंगे। ऐसे में यदि आप दोनों यह नहीं जानते हैं कि आप दोनों किस बारे में बहस कर रहे हैं, तो भला कोई समाधान कैसे निकल सकता है? इसलिए यदि आप वास्तव में हमेशा के लिए वाद-विवाद को समाप्त करना चाहते हैं, तो अपने क्रोध को नियंत्रित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने गुस्से को नियंत्रित करने के बाद आप अपने साथी के साथ विनम्रता से बात करें। ध्यान रहे विवाद को नियंत्रित करने और इसे हल करने के लिए आपको वास्तव में उस टोन की जांच करने की आवश्यकता है जो आप उपयोग कर रहे हैं यानी कठोर और व्यंग्यात्मक लहजे का प्रयोग ना करें। ऐसा करने से आपके साथी के मन में ग़ुस्सा पैदा होगा, जिससे बात बनते-बनते बिगड़ जाएगी। विनम्रता एक तर्क को शांति से हल करने की कुंजी है। यह आपके साथी के ग़ुस्से को कम करने में भी मदद करेगा।
तनाव में अपने Partner के साथ बहस के दौरान विद्रोही तरीक़े से कार्य न करें। इसका मतलब है कि अगर आपका जीवनसाथी कुछ विषय लाता है या उस पर बात करता है, तो उन पर हमले के अंदाज़ में जवाब न दे। आपको एक आरोप का दूसरे आरोप से सामना नहीं करना चाहिए। यह समझने की कोशिश करें कि आपका साथी अपनी बात के साथ क्या कहना चाहता है यदि आप स्थिति को उनके दृष्टिकोण से देख सकते हैं, तो क्या आप तर्क के बेयरिंग तक नहीं पहुंच पाएंगे। इस तरह आप मुद्दे को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। एक बार जब आप उनकी बात समझ जाते हैं, तो आप परिस्थिति को भी अच्छी तरह देख पाएंगे। यदि आपका साथी ग़लत भी है, तो एक शांतिपूर्ण तरीक़े से बात को समझा और समझाया जा सकता है।
आपको स्थिति को नियंत्रित करने की आवश्यकता है और इसे वहां से जाने न दें, जहां से वापस नहीं आ सके। क्योंकि एक बार स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाने पर समाधान थोड़ा मुश्किल हो जाता है। और आमतौर पर यही वह समय होता है, जब अधिकांश रिश्ते टूट जाते हैं। उपर्युक्त सावधानियां बरतने से आपको अपने रिश्ते को बचाने में मदद मिलेगी, जो आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हम अक्सर कुछ ऐसा कहते हैं जिसे हम कहना नहीं चाहते, ना ही कभी ऐसा इरादा होता है, पर हो जाता है और बाद में पछतावा होता है। यह पूरी तरह से सामान्य बात है और ऐसा कुछ नहीं है, जिसके बारे में आपको शर्म आनी चाहिए। लेकिन अपनी ग़लती को स्वीकार न करने और जब भी कुछ ग़लत होता है, तो अपने साथी को दोष देने की आदत रिश्ते को तोड़ देती है। ऐसा ना करें।
उपर्युक्त बातों पर ध्यान देते हुए आप तर्क को नियंत्रित कर सकते हैं। आप एक-दूसरे को बढ़ने में मदद कर सकते हैं। यह विवाहित जोड़ों के साथ-साथ उन लोगों पर भी लागू होता है जो डेटिंग कर रहे हैं। इसलिए यदि कोई रिश्ता आपके लिए मायने रखता है, तो आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि वह कभी भी टूटे या बिखरे नहीं। वर्तमान समय में लोग कुछ अधिक ही अधीर होते जा रहे हैं। एक तरह से कह सकते हैं कि हम सभी दूसरों को सुनने की क्षमता खो रहे हैं। साथ ही हमेशा ख़ुद को सही साबित करने की होड़ लगी रहती है। हमने दूसरों की भावनाओं को समझना भी बंद कर दिया है, जिससे हमारे रिश्तों में खटास पैदा होती जा रही है। यही कारण है कि हम बहुत सारे विवाहित जोड़ों को तलाक़ लेते हुए देखते हैं और कई युवा जोड़े टूट रहे हैं। रिश्तों में बहस या फिर वाद-विवाद अधिक हो रहा है। छोटी-छोटी बहस बढ़ते हुए बड़ा रूप ले लेती है और पति-पत्नी के रिश्ते बिखर जाते हैं। इसी संबंध में काउंसलर और टैरो कार्ड रीडर जीविका शर्मा ने कई उपयोगी बातें बताई।