ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित चिडियाघर में मरने वाले पक्षियों के शरीर में एच5एन8 विषाणु के पाए जाने की पुष्टि हो गई है। ये एवियन इंफ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) का ही एक प्रकार का विषाणु बताया जा रहा है, जो मनुष्यों के लिए अपेक्षाकृत कम खतरनाक होता है। ग्वालियर नगर निगम आयुक्त अनय द्विवेदी ने दूरभाष पर यूनीवार्ता को बताया कि गांधी प्राणी उद्यान में पिछले कुछ दिन में लगभग 15 पंछियों की मौत के मामले में भोपाल की प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में एच5एन8 विषाणु की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट आने के बाद वन विभाग का अमला पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ आगे की कार्रवाई में जुट गया है। द्विवेदी ने बताया कि ये विषाणु मनुष्यों के लिए उतना खतरनाक नहीं है, इसके बावजूद चिडियाघर में पूरी सावधानी बरती जा रही है।
अभी उस हिस्से को बंद ही रखा गया है। शेष पक्षियों को संक्रमण से बचाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
ग्वालियर के चिडियाघर में लगभग 15 पक्षियों की मौत को दिल्ली के चिड़ियाघर में पिछले कुछ दिनों में कई पक्षियों की मौतों से जोड़ कर देखा जा रहा था। पक्षियों की मौतों का कारण एच5एन1 विषाणु को समझा जाने के कारण दिल्ली के बाद ग्वालियर के चिडियाघर के उस हिस्से विशेष को भी बंद कर दिया गया है।एच5एन1 विषाणुओं की श्रेणी में काफी घातक माना जाता है।

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